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क़ुरआन की अज़मत का पैग़ाम देगा जामिया मस्जिद का अज़ीम जलसा

क़ुरआन की अज़मत का पैग़ाम देगा जामिया मस्जिद का अज़ीम जलसा
26 जनवरी को जलसा-ए-अज़मत-ए-क़ुरआन व दस्तारबंदी, देशभर के उलमा की होगी शिरकत

नई दिल्ली | सियासत का राज़। राशिद चौधरी 
क़ुरआन-ए-मजीद की अज़मत, उसकी तालीम और समाज में उसके पैग़ाम को आम करने के उद्देश्य से आगामी 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को दिल्ली की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में एक अज़ीम-उश्शान “जलसा-ए-अज़मत-ए-क़ुरआन” का आयोजन किया जा रहा है। यह रूहानी व इल्मी जलसा हज़रत मौलाना मुफ़्ती मेहरबान अली साहब (रह.) की याद में आयोजित होगा।
इस बेमिसाल आयोजन में इजलास-ए-आम, अज़मत-ए-क़ुरआन और जलसा-ए-दस्तारबंदी को ख़ास तौर पर शामिल किया गया है, जिसमें बड़ी तादाद में उलमा-ए-किराम, हाफ़िज़-ए-क़ुरआन, मदरसा-तालिबे-इल्म और आम लोग शरीक होंगे।
नामचीन उलमा करेंगे ख़िताब
जलसे की सदारत देश के मशहूर आलिम-ए-दीन अल्लामा मौलाना सैयद बिलाल हुसैन साहब करेंगे, जबकि ख़िताब फरमाने वालों में मुफ़्ती सुहेल अहमद, मौलाना सलीम अहमद, मौलाना निज़ामुद्दीन, क़ारी मोहम्मद सईद और मौलाना सना उल्लाह जैसे जानी-मानी इल्मी शख़्सियतें शामिल रहेंगी। उलमा अपने बयानात में क़ुरआन की रौशनी में समाजी सुधार, अख़लाक़ी मजबूती और नई नस्ल की तालीम पर ज़ोर देंगे।
दस्तारबंदी: दीन की ख़िदमत का एहतराम
जलसे के दौरान हाफ़िज़-ए-क़ुरआन और उलमा-ए-किराम की दस्तारबंदी की जाएगी, जिसे दीन-ए-इस्लाम की ख़िदमत में एक अहम मील का पत्थर माना जाता है। यह लम्हा शरीक होने वालों के लिए फ़ख़्र और रूहानी सुकून का सबब बनेगा।
आयोजनकर्ताओं की ख़ास अपील
आयोजन कमेटी ने दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाक़ों के तमाम अहले-इस्लाम से अपील की है कि वे इस मुक़द्दस और इल्मी जलसे में बढ़-चढ़कर शिरकत करें और क़ुरआन से अपने रिश्ते को और मज़बूत करें।
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