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मकर संक्रांति पर दिल्ली पुलिस के डीसीपी का भावुक संदेश बना एकता और राष्ट्रप्रेम की मिसाल


मकर संक्रांति पर दिल्ली पुलिस के डीसीपी का भावुक संदेश बना एकता और राष्ट्रप्रेम की मिसाल

“धर्म नहीं, देश सर्वोपरि—हमारी माटी, हमारी संस्कृति से बनता है भारत”

ब्यूरो,( चीफ़ राशिद चौधरी) 
सियासत का राज़ | विशेष राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ डीसीपी जितेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा व्यक्त की गई भावनाएँ आज समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई हैं। उनका संदेश केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की आत्मा—उसकी मिट्टी, संस्कृति, परंपराओं और आपसी भाईचारे—को मजबूती से रेखांकित करता है।
डीसीपी जितेन्द्र मणि त्रिपाठी ने अपने संदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मुझे फर्क नहीं पड़ता कि आप हिंदू हैं या मुसलमान, सिख हैं या ईसाई—बस आपके दिल में हिंदुस्तान की धड़कन होनी चाहिए।”
यह पंक्तियाँ आज के समय में उस भारत की तस्वीर पेश करती हैं, जहाँ विविधता में एकता ही सबसे बड़ी पहचान है।
उन्होंने कहा कि हमारी माटी, हमारी भूमि, हमारे पर्व-उत्सव, हमारे खेल, हमारी लोक-संस्कृति और हमारा ‘स्व’—इन्हीं से मिलकर मेरा भारत, आपका भारत और हमारा भारत बनता है। यही भारत की असली ताकत है, जो हर नागरिक को एक सूत्र में बांधती है।
मकर संक्रांति जैसे लोकपर्वों का उल्लेख करते हुए डीसीपी ने देशभर में मनाए जाने वाले विविध त्योहारों—मकर संक्रांति, माघ बिहु, पोंगल, लोहड़ी तथा उत्तराखंड के पावन लोकपर्व खिचड़ी संग्रांद, उत्तरैणी, मकरैणि और घुघुतिया—का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सौहार्द के प्रतीक हैं।
डीसीपी जितेन्द्र मणि त्रिपाठी  का यह संदेश बताता है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी सिर्फ वर्दी तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज की नब्ज पहचानते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हैं। उन्होंने सभी देशवासियों को मकर संक्रांति के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि
“यह पर्व हमें नई ऊर्जा, नई दिशा और आपसी सद्भाव का संकल्प लेने का अवसर देता है।”
सियासत का राज़ मानता है कि ऐसे संदेश आज के दौर में बेहद जरूरी हैं, जब समाज को जोड़ने वाली आवाज़ें और मजबूत होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस के डीसीपी की यह सोच न केवल पुलिस बल का मान बढ़ाती है, बल्कि देश के युवाओं और आम नागरिकों को भी यह संदेश देती है कि भारत पहले है—धर्म, जाति और मजहब से ऊपर।
अंत में, सियासत का राज़ न्यूज की ओर से भी सभी देशवासियों को मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल, माघ बिहु और उत्तराखंड के समस्त लोकपर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय हिंद, जय भारत।
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