झूठे आरोपों की परतें खुलीं, अदालत ने कहा – छेड़छाड़ की कहानी गढ़ी हुई
रिपोर्ट: सियासत का राज़ |
राशिद चौधरी
(यह खबर जनहित में प्रकाशित)
New Ashok Nagar केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, क्लोज़र रिपोर्ट मंज़ूर
दिल्ली |
राजधानी दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने New Ashok Nagar थाना क्षेत्र के बहुचर्चित मामले FIR No. 360/2019 में एक अहम और सख़्त फैसला सुनाते हुए झूठे आरोपों की पोल खोल दी है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप मनगढ़ंत, असत्य और तथ्यों से परे पाए गए हैं।
ACJM (East) श्रीमती रिंकू जैन की अदालत ने 12 जनवरी 2026 को आदेश पारित करते हुए शिकायतकर्ता की प्रोटेस्ट पिटीशन को खारिज कर दिया और पुलिस द्वारा दाख़िल क्लोज़र रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 10 जून 2019 की रात वह अपने बीमार पति और रिश्तेदारों के साथ कैलाश अस्पताल गाजियाबाद से लौट रही थी। उसने दावा किया कि New Ashok Nagar नाले के पास एक ऑटो में उसके साथ मौजूद रिश्तेदार कुलदीप ने उसके साथ छेड़छाड़ की और दूसरे आरोपी जगबीर ने उसका समर्थन किया।
CCTV फुटेज ने बदल दी कहानी
कोर्ट के समक्ष कैलाश अस्पताल के मुख्य गेट की CCTV फुटेज पेश की गई, जिसे खुली अदालत में चलाया गया। फुटेज में साफ़ दिखा कि:
शिकायतकर्ता अपने पति के साथ उसी ऑटो में बैठी थी
अन्य रिश्तेदार अलग-अलग मोटरसाइकिलों पर थे
दो ऑटो में अलग-अलग बैठने का दावा पूरी तरह झूठा निकला
अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता के अनुसार घटना घटित होने की कोई संभावना ही नहीं थी।
अदालत की सख़्त टिप्पणी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि:
आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं
पूरा मामला वैवाहिक विवाद से प्रेरित
छेड़छाड़ और गंभीर आरोप गढ़े हुए और असत्य
शिकायतकर्ता के पति स्वयं कई वैवाहिक मुकदमों में उलझे हुए हैं
नतीजा साफ़
✔ शिकायतकर्ता की प्रोटेस्ट पिटीशन खारिज
✔ पुलिस की क्लोज़र रिपोर्ट स्वीकृत
✔ केस फाइल रिकॉर्ड रूम भेजने का आदेश
बड़ा सवाल
क्या झूठे आरोपों के ज़रिये कानून को हथियार बनाया जा रहा है?
यह फैसला न सिर्फ़ जांच एजेंसियों के काम को सही ठहराता है, बल्कि समाज के सामने कानून के दुरुपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।