दिल्ली नगर निगम में ‘पोस्टिंग प्रयोगशाला’ का खेल? नियमों को दरकिनार कर मनमानी के आरोप
(सियासत का राज़ न्यूज)
नई दिल्ली।
राजधानी की सबसे बड़ी स्थानीय निकाय दिल्ली नगर निगम एक बार फिर विवादों के घेरे में है। आरोप है कि यहां अफसरशाही की नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर नियमों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक निगम में अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी पहले वरिष्ठता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी, जिसका अंतिम निर्णय निगमायुक्त के अधिकार क्षेत्र में माना जाता था। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और बाहरी दबाव में नियुक्तियों का खेल खेला जा रहा है।
आरोपों का केंद्र क्या है?
निगम में पदोन्नति और पोस्टिंग के नियमों को दरकिनार करने के आरोप
वरिष्ठता और तय प्रक्रिया की अनदेखी
कुछ अधिकारियों को उपायुक्त रहते हुए अतिरिक्त आयुक्त की जिम्मेदारी देना
उदाहरण के तौर पर 2014 बैच के अफसर—
Santosh Rai
Swetika Sachan
Dr. Angel Bhati
बतौर उपायुक्त निगम में आए थे, लेकिन आरोप है कि उन्हें अतिरिक्त आयुक्त का कार्यभार सौंप दिया गया।
नई पोस्टिंग पर भी सवाल
इसी क्रम में अब 2011 और 2012 बैच के अफसरों—
Sanjeev Kumar Mittal
B.S. Jaglan
Dr. Satyendra Singh
को अतिरिक्त आयुक्त बनाकर भेजे जाने की चर्चा है।
साथ ही 2022 बैच के अधिकारियों—
Vairokpam Punshiba Singh
Kanika Goyal
Raghvendra Meena
को उपायुक्त के तौर पर तैनाती के आदेश को भी मनमानी का उदाहरण बताया जा रहा है।
बड़ा सवाल
क्या निगम में नियुक्तियों का फैसला तय नियमों से हो रहा है या राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में?
क्या पारदर्शिता और मेरिट को दरकिनार किया जा रहा है?
और सबसे अहम—क्या इस पर कोई जांच होगी?
सियासत का राज़ न्यूज़ की मांग
नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच
पोस्टिंग प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए
नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय हो
राजधानी की जनता जानना चाहती है कि शहर की सफाई, विकास और प्रशासन संभालने वाली संस्था में आखिर किसका राज चल रहा है—नियमों का या रसूख का?