अल्लाह ने क़ुरान हिफ़्ज़ करने वालों को दिया अपना नाम : मुफ़्ती शाहिद सरवर
मदरसा इस्लामिया अरबिया इज़हारुल उलूम के चार हाफिज-ए-कुरान की हुई दस्तारबंदी
सियासत का राज़ न्यूज
नई दिल्ली। अराम पार्क इलाके में मदरसा इस्लामिया अरबिया इज़हारुल उलूम के चार विद्यार्थियों के हाफिज-ए-कुरान बनने पर दस्तारबंदी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कुरान की फ़ज़ीलत, उसके महत्व और इस्लामी शिक्षा की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता फ़िक्की के पैट्रन हाफिज सलीम अहमद ने की, जबकि मंच का संचालन मुफ़्ती कलीमुल्लाह ने किया। आयोजन कारी मुख्तार अहमद नदवी की देखरेख में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में मस्जिद अबू बकर, ओखला के इमाम मुफ़्ती शाहिद सरवर क़ासमी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में हाफिज-ए-कुरान के दर्जे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अल्लाह के लगभग 5000 नामों में से एक नाम “हाफिज” भी है। उन्होंने कहा कि जब अल्लाह ने यह नाम कुरान को याद करने वालों को अता किया है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस्लाम में कुरान का इल्म हासिल करने और उसे हिफ्ज़ करने वालों का स्थान कितना ऊंचा है।
खुरेजी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना उज़ैफ़ा मज़ाहिरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आधुनिक शिक्षा से परहेज़ नहीं है, बल्कि समय के साथ चलना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ कुरान और दीन की तालीम भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और आधुनिक शिक्षा का संतुलन ही समाज को सही दिशा दे सकता है।
इस अवसर पर मस्जिद नूर उल्लाह, अराम पार्क के इमाम मुफ़्ती सालिम क़ासमी, फ़िक्की के चेयरमैन डॉ. मुश्ताक अंसारी, मौलाना साबिर क़ासमी, हाफिज इश्तियाक, मौलाना खुर्शीद, हाफिज अब्दुल मन्नान, हाफिज अनवर, मुफ़्ती शाबान और हाफिज साक़िब सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की और हाफिज-ए-कुरान विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की सफलता में मदरसा कमेटी के पदाधिकारियों हाफ़िज़ रिज़वानुल्लाह, इम्तियाज़ अंसारी, नूर मोहम्मद सैफी, इकबाल सैफी, इश्तियाक अंसारी, मोहम्मद यूसुफ और मोहम्मद ताहिर का विशेष योगदान रहा।