SUV को मौत बनाकर कुचला गया एक नौजवान:
परिवार का दर्द यह हादसा नहीं, योगेश कुमार की हत्या है!
संवाददाता (SKR NEWS)
24 दिसंबर 2025 को दोपहर लगभग 1:30 बजे के करीब , दिल्ली के ब्रह्माकुमारी चौक (झंडेवाला रोड–फैज रोड क्षेत्र) पर जो कुछ हुआ, वह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं था। यह एक ऐसी घटना थी जिसमें एक भारी भरकम SUV को हथियार की तरह इस्तेमाल कर एक नौजवान की जान ली गई, जिसके ऊपर चार लोग निर्भर है। उसकी छोटी बहन छोटा भाई,उसकी पत्नी और उसकी 8 महीने की बच्ची,
यह केस पुलिस स्टेशन DBG रोड New,दिल्ली-110005 का है।
और उसके बाद कानून, पुलिस और इंसानियत—तीनों को लगातार कुचला गया परिवार पुलिस की कार्यशैली से नाराज।
आनंद पर्वत, नई दिल्ली निवासी योगेश कुमार, एक नौजवान बाइक पर सवार होकर, रोज़मर्रा की तरह सड़क पर थे। उसी समय एक भारी भरकम SUV Mahindra Alturas को Mansanjam Singh (उम्र 23 वर्ष), पुत्र जसप्रीत सिंह, निवासी शक्ति नगर, नई दिल्ली अत्यधिक तेज़ गति से और गलत दिशा (wrong side) में चला रहा था। जिसने योगेश (37)को मौत के घाट उतार दिया।
यह इलाका अत्यंत भीड़भाड़ वाला है। यहाँ रेड लाइट है, पैदल यात्री चलते हैं, छोटे वाहन चलते हैं। कार चालक को यह पूरी जानकारी थी कि:
वह एक भारी और घातक तरीके से SUV चला रहा है
इलाका भीड़भाड़ वाला है
गलत दिशा और तेज़ गति में वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है
इसके बावजूद, उसने अपनी SUV को वाहन नहीं बल्कि हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
परिवार ने जब मौके पर देखा और जानकारी प्राप्त की SUV ने बाइक सवार योगेश कुमार को ज़ोरदार टक्कर मारी, गाड़ी उनके ऊपर चढ़ा दी और उन्हें अपने टायर में फँसाकर काफी दूरी तक घसीटते हुए ले गया। यह दृश्य किसी साधारण दुर्घटना जैसा नहीं था। यह एक घातक हमला था। योगेश के शरीर से नल की तरह खून बहने की जानकारी मिली।
हर तरफ सीसीटीवी कैमरे मौजूद पर पुलिस को अभी तक फुटेज नहीं मिलना पुलिस की कार्यकारणी पर सवाल खड़े कर रहा है।
24 दिसंबर 2025 से आज तक सीसीटीवी कैमरा फुटेज पुलिस के हाथ न लगना साफ जाहिर करता है कहीं पुलिस एक्सिडेंट की गंभीरता को छुपाने में तो शामिल नहीं?
यह दुर्घटना नहीं, हत्या क्यों है।*
कानून की दृष्टि में, जब कोई व्यक्ति यह जानते हुए भी कि उसका कृत्य जानलेवा हो सकता है, फिर भी उसी तरीके से कार्य करता है, तो वह महज़ लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य होता है।
यहाँ कार चालक को पूरी जानकारी थी:
उसकी SUV भारी है
उसका ड्राइविंग तरीका खतरनाक था
परिणाम किसी की मौत हो सकता है
फिर भी उसने वही किया। इसलिए यह कहना गलत नहीं कि SUV को हथियार बनाकर योगेश कुमार की हत्या की गई।
*गंभीर आरोप घायल को बचाने के बजाय खुद को बचाने की कोशिश*
घटना के बाद Mansanjam Singh ने योगेश को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह मौके से भागने की फिराक में लगा रहा। *जब पब्लिक ने उसे घेर लिया,* तब वह पकड़ा गया।
वह योगेश को अस्पताल ले जाने के लिए भी तैयार नहीं था। *स्थानीय लोगों के दबाव में, योगेश को जबरन उसी SUV में डाला गया।*
पालनहार पिता विनोद हमे एक्सीडेंट की जानकारी हमारे बेटे योगेश के ऑफिस से मालूम हुई वहां से फोन आया योगेश का एक्सिडेंट हो गया है जहां,सबूत मिटाने की खुली कोशिश का पता लगा*
कार चालक ने तुरंत अपने एक जानकार को फोन किया। वह व्यक्ति स्कूटी से मौके पर पहुँचा और SUV के अंदर से कुछ व्हिस्की की बोतलें निकालकर स्कूटी से फरार हो गया।
डॉक्टर विनोद ने बताया
यह सब कुछ:
पुलिस की मौजूदगी में
केस के IO HC सतीश की आँखों के सामने
होता रहा, लेकिन किसी ने उसे नहीं रोका।
इस दौरान मृतक योगेश को बचाने की कोई चिंता नहीं थी। सारा ध्यान सबूत मिटाने और आरोपी को बचाने पर था।
SUV driver नशे में, लेकिन मेडिकल जांच नहीं पुलिस पर भी लगा आरोप*
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार चालक नशे की हालत में था। कानून के अनुसार ऐसे मामलों में ड्राइवर का मेडिकल (Alcohol/Drug Test) तुरंत कराया जाना अनिवार्य है।
लेकिन:
Mansanjam सिंह का मेडिकल परीक्षण पुलिस ने जानबूझ कर नहीं करवाया।
नशे की पुष्टि करने का सबूत जानबूझकर नष्ट किया गया।
युगेश के पालनहार पिता विनोद का बयान गलत अस्पताल ले जाकर कीमती समय नष्ट*
घटना स्थल से मात्र 1–2 किलोमीटर के भीतर कई बड़े सरकारी और निजी अस्पताल मौजूद हैं, जहाँ जीवनरक्षक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इसके बावजूद योगेश को Anjuman Hospital नामक एक छोटे निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ कोई इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
अस्पताल के डॉक्टरों ने योगेश को हाथ तक नहीं लगाया। वह अस्पताल के बाहर पड़ा रहा। लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन:
न अस्पताल ने इंसानियत दिखाई
न पुलिस ने कोई त्वरित कदम उठाया।
परिवार वालों का आरोप पुलिस मौजूद, फिर भी जान बचाने का कोई प्रयास नहीं*
Anjuman Hospital के पास:
PCR की कई गाड़ियाँ
ट्रैफिक पुलिस की बाइक केस के IO हेड कॉन्स्टेबल सतीश
सब मौजूद थे। फिर भी:
लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस नहीं बुलाई गई
योगेश को तुरंत बड़े अस्पताल नहीं भेजा गया।
जब जन दबाव बढ़ा, तब बहुत देर बाद योगेश को सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
परिजनों से अमानवीय व्यवहार
जब योगेश के परिजन अस्पताल पहुँचे और IO से अनुरोध किया कि योगेश को बड़े सरकारी अस्पताल ले जाया जाए, तो आरोप है कि हेड कॉन्स्टेबल सतीश ने कहा:
*“अगर ज़्यादा जल्दी है तो अपने भाई को अपनी किसी बड़ी गाड़ी में ले जाओ”*
यह व्यवहार एक पुलिस अधिकारी का नहीं, बल्कि संवेदनहीन सिस्टम का चेहरा था।
कार में मौजूद युवती को फरार कराया गया
कार में एक युवती भी मौजूद थी, जिसके पास बड़े-बड़े सूटकेस थे। आरोप है कि:
पुलिस की मदद से उसे मौके से फरार किया गया।
उसके सूटकेस कार से निकलवाए गए
बाद में थाने में भी उसे कभी नहीं बुलाया गया।
परिवार का आरोप FIR में देरी, गलत स्थान और बार बार रिक्वेस्ट करने पर भी FIR की कॉपी तुरंत नहीं दी गई।*
इस गंभीर घटना में:
FIR तुरंत दर्ज नहीं की गई
FIR में घटनास्थल गलत लिखा गया
*Jhndewala road, NEAR HINDUSTAN PETROL, PUMP,*
जबकि वास्तविक स्थान: ब्रह्माकुमारी चौक फैज रोड Red light (जहाँ पेट्रोल पंप है ही नहीं )
* पोस्टमार्टम से पहले दबाव*
अगले दिन जब योगेश का पोस्टमार्टम लेडी हार्डिंग मेडिकल हॉस्पिटल में होना था और पूरा परिवार हॉस्पिटल में मोर्चरी के पास मौजूद था, तभी ASI मोहन का फोन आया।
उन्होंने कहा:
“पहले थाने आओ।”*
जब परिवार ने बताया कि वे अस्पताल में हैं, तो जवाब मिला:*“तुम लोगों का हॉस्पिटल में क्या काम है?*
*तुम्हें हॉस्पिटल नहीं, थाने आना चाहिए।”*
निष्कर्ष: यह सिस्टम की लापरवाही से हुई हत्या है*
इन सभी तथ्यों को जोड़कर देखें तो यह स्पष्ट होता है कि:
यह साधारण एक्सीडेंट नहीं
*यह SUV को हथियार बनाकर की गई हत्या है*
और उसके बाद सबूत मिटाने व आरोपी को बचाने की कोशिश की गई
यदि ऐसे मामलों में भी न्याय नहीं मिलता, तो यह केवल योगेश कुमार के परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और न्याय व्यवस्था की हार होगी।
न्याय योगेश कुमार के लिए ज़रूरी है—ताकि सड़क पर कोई और SUV किसी और ज़िंदगी को हथियार बनकर न कुचल सके।
जिस तरह परिवार में गम्भीर आरोप लगाए है सभी पहलुओं पर जांच जरूरी है और सीसीटीवी फुटेज़ सामने लाना जरूरी है जिससे सच्चाई का खुलासा हो ये हादसा था या या सोची समझी साजिश।
परिजनों की पुकार,पीड़ित +91 98118 69044