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दिल्ली में अवैध नाइट क्लब–बार का खुला खेल!25 मौतों के बाद भी कानून बेबस, प्रशासन मौन

दिल्ली में अवैध नाइट क्लब–बार का खुला खेल!
25 मौतों के बाद भी कानून बेबस, प्रशासन मौन

 विशेष खोजी रिपोर्ट | सियासत का राज
नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली में कानून व्यवस्था पर एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
जीवन एक संघर्ष (रजि.) संस्था की ओर से दिल्ली पुलिस कमिश्नर, एलजी, मुख्य सचिव, आबकारी विभाग और अन्य शीर्ष अधिकारियों को भेजी गई एक विस्तृत शिकायत ने अवैध नाइट क्लब और बारों के पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि गोवा के नाइट क्लब हादसे में 25 लोगों की मौत के बावजूद दिल्ली में न तो सबक लिया गया और न ही सख्त कार्रवाई की गई। इसके उलट, कई बार और नाइट क्लब बिना वैध लाइसेंस, तय समय सीमा से कहीं आगे तक और नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं।
 शिकायतकर्ता संस्था कौन?
🔹 संस्था का नाम: जीवन एक संघर्ष (रजिस्टर्ड)
🔹 उद्देश्य: जनहित, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही
🔹 शिकायत किसे दी गई:
दिल्ली पुलिस कमिश्नर
उपराज्यपाल दिल्ली
मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार
आबकारी आयुक्त
संबंधित जिलों के डीसीपी व एसएचओ

 शिकायत में दर्ज गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार—
कई बार/नाइट क्लब बिना वैध लाइसेंस संचालित
सुबह 4–5 बजे तक शराब परोसना आम बात
नाबालिगों की एंट्री और नशे का खुला खेल
ध्वनि प्रदूषण, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा से समझौता
स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नाम मात्र की
बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी छापेमारी नहीं
शिकायत में साफ लिखा है कि
“नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के बजाय उन्हें बार-बार राहत मिल जाती है।

 शिकायत पत्र में दर्ज बार / रेस्टोरेंट के नाम
शिकायत के दूसरे पृष्ठ में जिन बार और रेस्टोरेंट का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, वे इस प्रकार हैं:
1️⃣ Jannat Resto & Bar
 पता: पॉकेट A-210 से 217 के बीच, महादेव एन्क्लेव,
सेक्टर-3, रोहिणी, दिल्ली-85
2️⃣ Yash Bar & Restaurant
 पता: W-Block, सेक्टर-3, रोहिणी, दिल्ली-85
3️⃣ बिग डैडी क्लब, राजीव चौक, दिल्ली
4️⃣ डी-ए-वी क्लब, द्वारका, दिल्ली
5️⃣ मिलेनियम क्लब, साहिबाबाद बॉर्डर के पास, दिल्ली
6️⃣ प्रथम क्लब,
 बी-4, धर्म मार्केट, विकासपुरी, दिल्ली
(राम मार्ग मेट्रो के सामने)
,, शिकायत में यह भी उल्लेख है कि इनके अलावा भी कई बार/नाइट क्लब इसी पैटर्न पर चल रहे हैं, जिनकी जाँच अब तक कागजों से बाहर नहीं आई।

 सबसे बड़ा खतरा: अगला हादसा दिल्ली में?
शिकायत चेतावनी देती है कि—
क्षमता से ज्यादा भीड़
अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी
इमरजेंसी एग्जिट और फायर एनओसी पर सवाल
अगर किसी रात कोई हादसा होता है, तो
“जिम्मेदारी तय करना नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि कार्रवाई पहले ही नहीं हुई।”
दिल्ली पुलिस और प्रशासन से सीधे सवाल
🔴 जब बार के समय तय हैं, तो उल्लंघन पर तुरंत सील क्यों नहीं?
🔴 क्या अवैध बारों को राजनीतिक/प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
🔴 क्या आबकारी और स्थानीय पुलिस की भूमिका की जाँच होगी?
🔴 25 मौतों के बाद भी क्या दिल्ली किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?
 चेतावनी भी दर्ज
शिकायत में साफ शब्दों में कहा गया है कि
अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई तो—
उच्च न्यायालय का दरवाजा
मानवाधिकार आयोग
और मीडिया के माध्यम से
जनहित याचिका और राष्ट्रव्यापी खुलासा किया जाएगा।
 **यह सिर्फ बारों की खबर नहीं…
यह दिल्ली में कानून के इकबाल की परीक्षा है।**
अब सवाल यह है—
क्या दिल्ली पुलिस और प्रशासन जागेगा,
या अगली हेडलाइन किसी बड़े हादसे के बाद लिखी जाएगी?
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