हमदर्द नेशनल फ़ाउंडेशन और हार्मोनी हैल्थ एंड एजुकेशन फ़ाउंडेशन की अनोखी पहल
“इल्म रोशनी है, मगर किरदार उसकी असल पहचान” — डॉ. मुश्ताक अंसारी
ब्यूरो चीफ़ राशिद चौधरी
सियासत का राज़ न्यूज
नई दिल्ली | वज़ीराबाद से इंसानियत की मिसाल
रमज़ान का पाक महीना जहां एक तरफ़ इबादत, सब्र और रहमत का पैग़ाम देता है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर तबकों तक मदद पहुंचाने की सीख भी देता है। इसी जज़्बे को अमल में उतारते हुए हमदर्द नेशनल फ़ाउंडेशन और हार्मोनी हैल्थ एंड एजुकेशन फ़ाउंडेशन ने वज़ीराबाद क्षेत्र में ज़रूरतमंद परिवारों के बीच रमज़ान फ़ूड किट का वितरण कर सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश की।
मगर यह आयोजन सिर्फ़ राशन वितरण तक सीमित नहीं रहा — यह एक विचार क्रांति का मंच भी बना, जहाँ “शिक्षा और संस्कार” जैसे गूढ़ विषय पर गहन मंथन हुआ।
शिक्षा के साथ संस्कार — असली कामयाबी का सूत्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता फेस ग्रुप के चेयरमैन डॉ. मुश्ताक अंसारी ने की। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा:
“डिग्री इंसान को पढ़ा-लिखा बना सकती है, मगर संस्कार ही उसे क़ाबिल शख़्सियत बनाते हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि नैतिक मूल्यों की पहली पाठशाला घर होता है। बच्चों के चरित्र निर्माण में माता-पिता और बुज़ुर्गों का मार्गदर्शन सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि शिक्षा के साथ नैतिकता न हो, तो समाज में असंतुलन पैदा होता है।
बेटियों की तालीम — समाज की तरक़्क़ी
उपाध्यक्ष डॉ. अबूज़र ख़ान ने अपने संबोधन में विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि:
“एक बेटी का शिक्षित होना, पूरे परिवार के शिक्षित होने के बराबर है।”
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बेटों और बेटियों में किसी प्रकार का भेदभाव न करें और दोनों को समान अवसर प्रदान करें।
परवरिश में समानता और प्रोत्साहन
कार्यक्रम में मौजूद उज़मा अंसारी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत क्षमता को पहचानना और प्रोत्साहित करना अधिक आवश्यक है।
फाउंडेशन की अध्यक्ष शबाना अज़ीम ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग के लिए हमदर्द के ओएसडी शौक़त एच. एच. मुफ़्ती का विशेष आभार व्यक्त किया और कहा कि ज़रूरतमंद परिवारों तक फ़ूड किट पहुँचाने में संस्थान का सहयोग सराहनीय रहा।
मौजूद रहे गणमान्य अतिथि
इस अवसर पर वसीमुद्दीन सैफ़ी, नूरुद्दीन अंसारी, डॉ. बिलाल अंसारी, फरहुन निशा, जुल्फ़िकार और जैनब अंसारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने सामाजिक एकता और सहयोग के इस प्रयास की सराहना की।
इबादत के साथ इंसानियत
रमज़ान का असली पैग़ाम सिर्फ रोज़ा और नमाज़ तक सीमित नहीं, बल्कि इंसानियत, बराबरी और नैतिक मूल्यों को ज़िंदगी में उतारने में है। वज़ीराबाद में आयोजित यह कार्यक्रम इसी सोच का जीवंत उदाहरण बना — जहाँ मदद भी थी, और मार्गदर्शन भी।
यह आयोजन एक संदेश छोड़ गया —
इल्म ज़रूरी है, मगर किरदार उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।